केंद्रीय कैबिनेट ने PF में सरकार की तरफ से योगदान की योजना को अगस्त तक बढ़ाया

केंद्रीय कैबिनेट ने PF में सरकार की तरफ से योगदान की योजना को अगस्त तक बढ़ाया

केंद्रीय कैबिनेट ने PF में सरकार की तरफ से योगदान की योजना को अगस्त तक बढ़ाया


केंद्रीय कैबिनेट ने कर्मचारियों को दिया राहत (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक सीमित आकार तक की इकाइयों में नियोक्ताओं और कर्मचारियों के हिस्से का भविष्य निधि में भुगतान सरकार की तरफ से किए जाने की योजना तीन महीने यानी अगस्त तक के लिये बढ़ाने के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दे दी. कोविड-19 महामारी के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत इस साल मई में इस योजना को अगस्त तक बढ़ाने की घोषणा की थी.मंत्रिमंडल की बैठक के बाद केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मंत्रिमंडल ने योजना अगस्त तक बढ़ाये जाने का मंजूरी दे दी जिसके तहत सरकार कर्मचारियों और नियोक्ताओं का भविष्य निधि में योगदान राशि देगी.”

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प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत भविष्य निधि में नियोक्ता और कर्मचारियों का 12-12 प्रतिश यानी कुल 24 प्रतिशत योगदान सरकार कर रही है.सरकार ने कोविड-19 संकट और उसकी रोकथाम के लिये लगाये गये ‘लॉकडाउन’ से छोटे प्रतिष्ठानों और उसमें काम करने वाले कर्मचारियों को राहत देने के लिये यह कदम उठाया है. यह योजना उन प्रतिष्ठानों के लिये है जहां कर्मचारियों की संख्या 100 तक है तथा उनमें से 90 प्रतिशत का मासिक वेतन 15,000 रुपये से कम है. इससे पहले, यह लाभ मार्च, अप्रैल और मई, 2020 के वेतन में दिया गया था. अब यह लाभ जून, जुलाई और अगस्त, 2020 के वेतन में मिलेगा.


एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आज (बुधवार) को हुई बैठक में कर्मचारी भविष्य निधि में कर्मचारियों का 12 प्रतिशत और नियोक्ताओं को 12 प्रतिश्त योगदान तीन महीने जून से अगस्त तक और देने का फैसला किया गया है…..”बयान के अनुसार यह मंजूरी मार्च से मई, 2020 तक के लिये पूर्व में दी गयी अनुमति के अलावा है. इस पर कुल 4,860 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है. इससे 3.67 लाख नियोक्ताओं और 72 लाख से अधिक कर्मचारियों को राहत मिलेगी.


जावड़ेकर ने कहा कि निर्णय कर्मचारियों और नियोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर किया गया. इससे एक तरफ जहां कर्मचारियों के पास वेतन के रूप में ज्यादा पैसा आएगा वहीं नियोक्ताओं को भविष्य निधि बकाया के भुगतान में राहत मिलेगी.लाभ तीन महीने के लिये और बढ़ाये जाने से 3.67 लाख प्रतिष्ठानों को नकदी के मोर्चे पर राहत मिलेगी.बयान में कहा गया है कि सरकार 2020-21 के में इसके लिये 4,800 करोड़ रुपये का बजटीय समर्थन उपलब्ध कराएगी. प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत जून से अगस्त, 2020 के दौरान नियोक्ताओं के 12 प्रतिशत योगदान के लाभ लेने वालों को इससे अलग रखा जाएगा.

 

VIDEO:प्राइम टाइम : नियम में बदलाव क्या भविष्य निधि में सेंध?



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बिना सूचना नौकरी छोड़ने वाले 04 डाक्टरों और 40 नर्सों पर एफआईआर के निर्देश


प्रतीकात्मक तस्वीर

नोएडा:

कोरोना वायरस के संक्रमण से लोगों को सुरक्षित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य शिक्षा विभाग रजनीश दुबे ने इंदिरा गाधी कला केंद्र के सभागार में प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ बैठक की. बैठक में कोरोना संकट के बीच ग्रेटर नोएडा के शारदा हॉस्पिटल डाक्टरों और नर्सों के बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी छोड़ने के मामले को शासन ने बेहद गंभीरता से लिया है. स्वास्थ्य शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने इन डाक्टरों और नर्सों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं. 

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अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य शिक्षा विभाग रजनीश दुबे कहा कि सभी कोरोना संक्रमित व्यक्तियों को प्रोटोकॉल के अनुरूप इलाज मिले. उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की संख्या के अनुरूप आगामी परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए कोविड अस्पताल तैयार करने तथा उनमें पर्याप्त मात्रा में बैड व्यवस्था, चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था समय रहते सुनिश्चित की जाए. सेक्टर-06 स्थित इंदिरा गांधी कला केंद्र में प्रदेश के स्वास्थ्य शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव जिले के अफसरों के साथ बैठक कर रहे थे. उसी दौरान ग्रेटर नोएडा के शारदा हॉस्पिटल से बिना पूर्व नोटिस के चार डाक्टरों और 40 नर्सों के नौकरी छोड़कर चले जाने का मामला उठाया गया. इस मामले को अपर मुख्य सचिव ने बेहद गंभीरता से लेते हुए एफआईआर दर्ज कराने और कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिया है. 

शारदा हॉस्पिटल जिले के कोविड-19 हॉस्पिटलों में शुमार है. वहां काम कर रहे 4 डॉक्टर और 40 नर्सों के बिना बताए जॉब छोड़कर चले गए. इससे हॉस्पिटल में कोविड-19 मरीजों के उपचार में बाधा आ रही है. बैठक में गौतमबुद्ध नगर जिले के कोविड-19 के नोडल अधिकारी नरेंद्र भूषण और जिलाधिकारी सुहास एलवाई के अलावा अन्य अधिकारी मौजूद थे.

 

VIDEO:SC ने नोएडा प्रशासन को फटकारा, क्वारंटाइन के मामले में केंद्र के नियमों का करें पालन



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लॉकडाउन का असर: व्यक्ति को पत्नी को पाकिस्तान छोड़कर लौटना पड़ा भारत


लॉकडाउन के कारण भारतीय परिवार महीनों तक पाकिस्तान में ही फंसा रहा

जोधपुर:

राजस्थान का रहने वाला लीलाराम (34) पाकिस्तान के मीरपुर खास में अपनी बीमार सास से मिलने अपने परिवार के साथ जब घर से निकला था, तो उसे इस बात का कतई अंदाजा नहीं था कि उसे अपनी पत्नी के बिना ही देश लौटना पड़ेगा.

कोरोना वायरस को काबू करने के लिए भारत में लागू किए गए लॉकडाउन के कारण परिवार महीनों तक पाकिस्तान में ही फंसा रहा. भारत और पाकिस्तान में इस प्रकार फंसे लोगों को स्वदेश भेजने के लिए सहमति बनने के बाद प्राधिकारियों ने लीलाराम और उसके तीन बच्चों को वापस जाने की अनुमति दे दी, लेकिन उसकी पत्नी जनता (33) के पास भारतीय नागरिकता नहीं होने के कारण उसे भारत नहीं आने दिया गया.

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लीलाराम ने कहा कि इस्लामाबाद में भारतीय दूतावात ने उसकी पत्नी को लौटने की अनुमति नहीं दी और उसे अपनी पत्नी को पाकिस्तान छोड़कर बच्चों के साथ लौटना पड़ा. लीलाराम 1986 में पाकिस्तान से भारत आया था और उसे बाद में भारतीय नागरिकता मिल गई थी, लेकिन उसकी पत्नी के पास भारत की नागरिकता नहीं है और वह दीर्घकालीन वीजा पर यहां रह रही थी.

VIDEO:महाराष्ट्र : ठाणे में 12 जुलाई तक लॉकडाउन



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विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा- भारत ने कूटनीति  के ऑनलाइन मंचों का बेहतर इस्तेमाल किया है

विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा- भारत ने कूटनीति के ऑनलाइन मंचों का बेहतर इस्तेमाल किया है


कोरोना संकट के दौर में भारत ने डिजिटल माध्यम से कूटनीति को मजबूत किया

नई दिल्ली:

विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 महामारी से उत्पन्न होने वाली स्थिति के कारण कूटनीति जोरदार ढंग से डिजिटल हो गई है, और भारत चुनौती को ऑनलाइन मंचों का इस्तेमाल कर वैश्विक बातचीत शुरू करने के अवसर में बदलने में सबसे आगे रहा है. ‘आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को लागू करने’ पर ‘इंस्टीटयूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया’ द्वारा आयोजित एक वेबिनार में श्रृंगला ने कहा कि कोविड-19 ने कूटनीतिक कैलेंडर को बाधित कर दिया है, जिसके कारण लगभग सभी अंतरराष्ट्रीय बैठकें रद्द हो गई हैं.

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उन्होंने कहा कि संकट के समय में एक समन्वित वैश्विक प्रतिक्रिया की आवश्यकता है, जिससे सभी देशों के बीच निरंतर संचार हो सके.उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) समेत दुनिया के विभिन्न भागों में तनाव में वृद्धि ने केवल संचार की आवश्यकता पर जोर दिया है.श्रृंगला ने कहा कि कूटनीति ने नई स्थिति को अपनाया है और मजबूती के साथ डिजिटल हुई है.उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह की डिजिटल कूटनीति में भारत सबसे आगे रहा है. मैंने पहले उल्लेख किया था कि कैसे प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन मंचों का उपयोग करके चुनौती को वैश्विक बातचीत शुरू करने के अवसर में बदला.”


विदेश सचिव ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार इस माध्यम से ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के साथ एक शिखर सम्मेलन भी किया. वह इस अवधि में 60 से अधिक देशों के अपने समकक्षों से भी बात कर चुके हैं.”उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी अपनी तरफ से 76 देशों के विदेश मंत्रियों से बात की है और वह ब्रिक्स, एससीओ, आरआईसी समूहों की बैठकों में भी शामिल हुए हैं.

 

VIDEO:पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा, ‘लोगों के सहयोग से ही लोकतंत्र मजबूत होता है’



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Lockdown Impact: Funding Dries up for Old Age Homes

Lockdown Impact: Funding Dries up for Old Age Homes


New Delhi: Living out their twilight years in old age homes, thousands of elderly persons across the country could lose the roof over their heads with funds for their donation-dependent refuges drying up in the past few months.

As businesses collapse and incomes shrink in the extended lockdown and post lockdown phase, many old age homes have been forced to trim their budgets for essentials such as rations and medicines and some fear they could be looking at closure if the financial crisis continues.

Old age homes, especially the smaller and mid-sized ones, have traditionally depended on donations from local philanthropic individuals and business communities. With the lockdown and economic recession, the same has totally dried up,” HelpAge India CEO Mathew Cherian told PTI.

Many institutions might be forced to shut shop due to the “drastic fall in their overall incomes”, he added.

According to HelpAge India, a non-profit organisation working for the disadvantaged elderly, there are nearly 1,500 old age homes in the country, housing nearly 70,000 people. 

Other than the luxurious enclaves for the affluent, most senior care homes depend on donations, in varying degrees, to keep things running smoothly.

The stakes are high for the residents, some of them taking on jobs such as cleaning, washing, cooking and making beds without assistance as their homes are forced to dispense with daily help.

Compelled by circumstance, they came in for various reasons – dysfunctional families, financial constraints or the need for companionship in the last years of their lives. The fear that the life they have finally settled into might be taken away imperils their sense of physical and emotional security.

Shashi Malhotra, 73, is one of those who said he doesn’t know where he will go if his home closes down.

The former inspector with the sales tax department separated from his wife in 2008 and hasn’t seen his sons in 12 years. With the impending challenges of old age and no family to turn to, he registered himself in an old age home run by the Delhi Metro Rail Corporation (DMRC).

It has been a decade since he moved to the home in south Delhi’s Govindpuri locality.

This is better than home. I feel happy and secure,” he said.

That this could be taken away from him is a thought almost too much to bear, Malhotra said.

The DMRC home, which houses Malhotra and 20 others over the age of 55 free of cost, has undergone a budgetary cut of almost 30%.

After the funding started decreasing, we have been facing difficulties in arranging rations, toiletries and medical supplies for the residents. Sometimes, we do get help from NGOs like HelpAge India, but we mostly have to just manage within the resources we have,” said Rohit Kumar, supervisor at the home.

The staff — there are four of them — hasn’t been laid off yet. But the future is uncertain.

Shantiniketan, an old age home in south Delhi’s Chhatarpur locality that provides shelter to 38 ‘homeless’ and poor residents above the age of 60, isn’t as lucky.

With a dip in funding by 50%, from both corporates as well as philanthropic individuals, the home had to let go of all four of its housekeeping staff.

The money from the funding is used for the upkeep of the home — rentals, and electricity bills, as well as staff salaries. We have had to ask our staff to not come, because we can’t pay their salaries anymore. 

We are grateful that we haven’t had any major medical emergencies yet, but we are not sure what we will do when that happens,” said Sister Ancy Johnson, who runs the home with her family.

She added that they do the chores around the home, including cleaning and cooking, on their own.

According to india.gov.in, while most old age homes in the country offer free accommodation and food, there are some that work on a payment basis depending on the type and quality of services offered.

The charges for paid facilities range anything between Rs 4,000-6,000 per month, said Himanshu Rath, founder of the Agewell Foundation. 

The total elderly population in the country runs close to 120 million, out of which 53.5 million are “disadvantaged”.

According to Helpage India’s Cherian, the depletion of funds is an immediate outcome of the “donor base” itself getting affected by the current state of affairs. 

With incomes threatened and businesses collapsing, it is understandable that donors — both corporates and philanthropic individuals — are unable to lend a helping hand, in cash or in kind, he said.

 “A conservative estimate would peg the quantum of decrease in support (for old age homes) at 50–60%,” Cherian said.

Life which was tough has just become tougher.

In the changed environment of social distancing most elderly have to take care of their needs themselves, as general staff are unable to attend to them due to lockdown rules and the coronavirus threat.

Many who have to go for routine medical checkups are the worst affected because not all homes are equipped with medical facilities,” Agewell Foundation’s Rath told PTI. 

A June 2020 survey by the not-for-profit NGO working for the welfare and empowerment of older persons revealed that approximately 55% elderly respondents (within and outside of old age homes) felt the “lockdown situation” is affecting their health conditions adversely. 

At least 75% of elderly patients said that they missed the healing touch of their doctor, as they could not visit them personally. Nearly 44% of the respondents feel that limited or no access to regular medicines and physiotherapy were among the most critical health challenges being faced by them,” the survey noted.

Rath said government authorities should provide “subsidy or loans and support for assisted living or senior care homes”.

Unless the government comes to the rescue, the situation will only “aggravate the penury of the homes”, leaving thousands of elderly homeless and without any care, agreed Cherian.

Government can also give pensions to all residents of old age homes under the National Social Assistance Programme… and also ‘White Ration Cards’ under Right to Food,” Cherian said.

HelpAge India has currently been aiding several old age homes to stay afloat  by providing them material and resources to counter COVID-19 crisis, said Cherian.



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CTET 2020 Exam: सीबीएसई ने स्थगित किया जुलाई में होने वाला सीटीईटी एग्जाम, जानिए डिटेल

ICAI ने कैंसिल किया CA का एग्जाम, अब नवंबर में होगी परीक्षा


ICAI ने कैंसिल किया CA का एग्जाम.

नई दिल्ली:

CA Exams Cancelled: इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (ICAI) ने मई/जुलाई में होने वाली सीए (CA) की परीक्षा कोरोनावायरस के खतरे के चलते कैंसिल कर दी है. अब ये परीक्षा नवंबर में होने वाली परीक्षा के साथ ही आयोजित की जाएगी. ICAI ने शुक्रवार शाम को ऑफिशियल नोटिस जारी करके CA की परीक्षा कैंसिल करने की जानकारी दी. बता दें कि पहले सीए (CA Exam) की परीक्षा 3 मई को होने वाली थी. लेकिन कोरोनावायरस के खतरे के चलते इसे स्थगित कर दिया गया था, जिसके बाद ICAI ने सीए परीक्षा को 29 जुलाई से 16 अगस्त के बीच आयोजित कराने का फैसला किया था. 

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देश में कोरोनावायरस के चलते स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है. ऐसे में स्टूडेंट्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ICAI ने परीक्षा को कैंसिल करने का बड़ा फैसला लिया है. अब ये परीक्षा नवंबर में होने वाली परीक्षा के साथ ही आयोजित की जाएगी. 

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (ICAI) ने गुरुवार को कोर्ट को सूचित किया था कि देश में कोविड-19 के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. कोरोना के खतरे के मद्देनजर वह 29 जुलाई से 16 अगस्त के दौरान प्रस्तावित सीए (CA) की परीक्षाएं आयोजित करने के संभव तरीके का आकलन करेगा और इस संबंध में राज्यों और परीक्षा केंद्रों से भी विचार करेगा.

ICAI के वकील ने पीठ से अनुरोध किया था कि जमीनी हालात का आकलन करने और परीक्षाएं आयोजित करवाने की व्यवहार्यता का पता लगाने के लिए उन्हें परीक्षा केंद्रों से संपर्क करना होगा और इसके लिए कुछ वक्त की जरूरत होगी. पीठ वीडियो कांफ्रेन्सिग के माध्यम से उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आईसीएआई द्वारा उम्मीदवारों को दिए गए ‘नहीं अपनाने (ऑप्ट आउट)’ के विकल्प को चुनौती दी गई थी. पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद इस मामले को 10 जुलाई के लिये सूचीबद्ध कर दिया था. लेकिन अब ICAI परीक्षा को स्थगित कर दिया है.  

ICAI ने कहा, “जिन छात्रों ने मई 2020 की परीक्षाओं के लिए आवेदन किया है, उनके पास नवंबर 2020 की परीक्षाओं के लिए नए सिरे से आवेदन करने के समय परीक्षा केंद्र बदलने का विकल्प होगा. ”





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कोरोना के समय में

कोरोना के समय में ‘कुमकुम भाग्य’ की शूटिंग हुई शुरू, एक्ट्रेस इंटरव्यू में बोलीं- यह नॉर्मल नहीं है…


कोरोना (Corona) के समय में ‘कुमकुम भाग्य (Kumkum Bhagya)’ की शूटिंग हुई शुरू

खास बातें

  • ‘कुमकुम भाग्य’ की शूटिंग हुई शुरू
  • एक्ट्रेस सृति झा ने इंटरव्यू में खुलकर की बात
  • कोरोना के समय में इंटरव्यू में लेकर कही ये बात

नई दिल्ली:

कोरोनावायरस (Coronavirus) के कारण देश में पिछले कुछ महीनों से लॉकडाउन (Lockdown) जारी है, हालांकि, अब सरकार ‘अनलॉक 2’ के साथ जनता को एहतियात दे रहे हैं. ऐसे में अब कुछ सीरियलों की शूटिंग भी शुरू हो चुकी हैं. हाल ही में ‘कुमकुम भाग्य (Kumkum Bhagya)’ की लीड एक्ट्रेस सृति झा ने लॉकडाउन (Lockdown) के बाद शूटिंग शुरू होने पर खुलकर अपनी बात रखी है. बता दें, ‘कुमकुम भाग्य’ काफी लोकप्रिय टीवी  सीरियल है. वहीं, 16 जुलाई से ‘कुमकुम भाग्य’ एक बार फिर प्रसारित होने वाला है. इसको लेकर फैन्स में काफी एक्साइटमेंट है.

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वहीं, सृति झा (Sriti Jha) ने पिंकविला को दिए इंटरव्यू में कोरोना के समय में फिर से शूटिंग शुरू होने को लेकर कहा, “यह नया है, यह निश्चित रूप से नॉर्मल नहीं है, और मुझे पता है कि हर कोई कह रहा है कि उनकी टीम बेस्ट है. लेकिन मैं सही मायने में मानती हूं कि कुमकुम भाग्य (Kumkum Bhagya) की प्रोडक्शन टीम ने जिस तरह से सेट पर सबकुछ तैयार किया है, वह सचमुच अनुकरण के योग्य है. मैं दोबारा शूटिंग शुरू होने को लेकर काफी नर्वस थी. लेकिन जब मैं सेट पर पहुंची, तो मेरा सारा डर खत्म हो गया.”

सृति झा (Sriti Jha) ने सेट पर बरते जा रहे एहतियाती उपाय को लेकर आगे कहा, “हर किसी की अपनी मेकअप किट हैं. विग्स और कॉम्ब सबके अलग-अलग पाउच में रखे रहते हैं. फर्श पर बहुत कम लोग होते हैं जब हर कोई सेट पर होता है और हर कोई मास्क और शिल्ड पहनता है. हम जिस भी कुर्सी पर बैठते हैं, उन्हें हमारे नामों के साथ लेबल किया गया है और स्पॉट दादा उन्हें हर बार सैनिटाइज करते रहते हैं.”



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Amid Lockdown, Lakhs of Coal Workers Begin 3-Day Strike

Amid Lockdown, Lakhs of Coal Workers Begin 3-Day Strike


New Delhi: All coal sector trade unions and federations began a three-day country-wide strike from Thursday, hitting production across coal-bearing states, to protest against the government’s decision to allow commercial mining of coal, including by foreign entities. Around 5.3 lakh permanent and contractors employees are said to be participating in the strike.

Unions claimed the strike was a ‘resounding’ success in public sector Coal India Ltd (CIL) and its subsidiaries, Eastern Coalfields Ltd (ECL), Bharat Coking Coal Ltd (BCCL), Central Coalfields Ltd (CCL), Western Coalfields Ltd (WCL), South Eastern Coalfields Ltd (SECL), Northern Coalfields Ltd (NCL), Mahanadi Coalfields Ltd (MCL),

“In North Eastern Coalfields Ltd (NECL) and CMPDIL and also in Singareni Collieries Company Ltd (SCCL) strike was near total,” said a press release by Centre of Indian Trade Unions (CITU), which has supported the strike along with other central trade unions, such as INTUC, AITUC, HMS. Incidentally, the Rashtriya Swayamsevak Sangh-backed Bharatiya Mazdoor Sangh (BMS) also joined the strike, pushed by the seething anger among coal workers.

The three-day strike by coal workers is the first big industrial action during the lockdown period against the Narendra Modi-led Bharatiya Janata Party government’s move to push through its “wholesale privatisation project of putting the national assets and PSUs on auction in favour of handful of private corporate, both foreign and domestic” said CITU.

The strike began after Wednesday’s talks failed between Coal India trade unions and the government over the issue of commercial coal mining. A virtual meeting was held between Coal Minister Pralhad Joshi and representatives of trade unions.

“During the meeting, the minister informed the unions that commercial mining is a policy decision of central government. The Minister said that this is the only way to increase the production of coal. The representatives of trade union reiterated their stand opposing commercial mining,” a coal union representative said.

Nathulal Pandey, President of HMS-affiliated Hind Khadan Mazdoor Federation, told PTI the strike was started by the workers on the first shift, which begins at 6 a.m. He claimed that in the Jhanjra area (West Bengal) of Eastern Coalfields, five leaders of the unions, three from HMS, one each from AITUC and CITU were arrested but were released after few hours.

Workers employed in the BCCL, a Coal India arm, have not gone to work and as a result emergency services such has hospitals in the mines have been paralysed, he added.

According to Pandey, on an average Coal India produces 1.3 million tonne (mt) of coal every day, so it is estimated that the production loss due to the three-days strike would be around 4 mt.

Besides, the general manager of the Sohagpur area (Madhya Pradesh) of SECL, a Coal India arm, has called outsiders to work in the mine which is an “extraordinary situation” and this has never happened to Coal India, Pandey said.

Meanwhile, a notice issued by the Public Relations Department of the BCCL claimed there was no impact of the strike in the first shift as all miners marked their attendance and resumed work as

The General Manager of CCL’s Barka-Sayal and officiating GM of Argada command area, Amresh Singh, however, said “dispatch of coal has been affected due to the strike, but coal mining via outsourcing private companies remained unaffected”

The Rashtriya Colliery Mazdoor Sangh (RCMS) General Secretary, A K Jha, said that the first shift, which began at 6 am, the miners reached the colliery but did not join the work.

“Production has been hampered in all the collieries of the BCCL and the Eastern Coalfields Limited,” he claimed.

Rajendra Singh Chandel, the Rashtriya Pragatishil Workers Union (RPWU), affiliated to CITU, which is leading the strike in Ramgarh district, claimed that coal production, dispatch has been affected as the coal workers extended support to the strike.

Trade union leader Hrishikesh Mishra said that coal workers held a demonstration in Giridih near a colliery.

Meanwhile, trade unions on Thursday claimed that mining activities in all the mines of Coal India and Singareni Collieries was suspended.

“The strike is total,” BK Rai, public sector in-charge of BMS told PTI.

CITU-backed All India Coal Workers Federation General Secretary B B Ramanandan said all the coal mining, dispatch, transport everything is totally stopped in the first shift that began at 6 am.

Earlier, in a statement, the Communist Party of India (Marxist) said coal was an essential input for several vital industries like power generation, steel, aluminum, fertilisers and cement. “This move by the central government will result in starving domestic industries of essential inputs as now exports will be unregulated,” it said in a statement

While noting that the 41 coal blocks identified for such privatisation fall in different parts of the country – Madhya Pradesh, Chhattisgarh, Jharkhand etc – the CPI(M) said most of these blocks were located in forest areas “will uproot the lives of our tribal communities”, while adding that unbridled privatisation accompanied by further deregulation of environmental norms, will “lead to severe environmental degradation.”

Coal India accounts for over 80% of domestic coal output.

CIL’s output has declined by 12.8% to 39.20 mt in June compared with 44.95 mt in June last year, the state-run miner said on Wednesday.

Coal India’s offtake also dropped to 41.61 mt in June from 48.98 mt in the corresponding month of the previous fiscal.

The public sector company said it was facing tepid demand from key customers like power producers.

(With inputs from PTI)



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