केंद्रीय कैबिनेट ने PF में सरकार की तरफ से योगदान की योजना को अगस्त तक बढ़ाया

केंद्रीय कैबिनेट ने PF में सरकार की तरफ से योगदान की योजना को अगस्त तक बढ़ाया

केंद्रीय कैबिनेट ने PF में सरकार की तरफ से योगदान की योजना को अगस्त तक बढ़ाया


केंद्रीय कैबिनेट ने कर्मचारियों को दिया राहत (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक सीमित आकार तक की इकाइयों में नियोक्ताओं और कर्मचारियों के हिस्से का भविष्य निधि में भुगतान सरकार की तरफ से किए जाने की योजना तीन महीने यानी अगस्त तक के लिये बढ़ाने के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दे दी. कोविड-19 महामारी के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत इस साल मई में इस योजना को अगस्त तक बढ़ाने की घोषणा की थी.मंत्रिमंडल की बैठक के बाद केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मंत्रिमंडल ने योजना अगस्त तक बढ़ाये जाने का मंजूरी दे दी जिसके तहत सरकार कर्मचारियों और नियोक्ताओं का भविष्य निधि में योगदान राशि देगी.”

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प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत भविष्य निधि में नियोक्ता और कर्मचारियों का 12-12 प्रतिश यानी कुल 24 प्रतिशत योगदान सरकार कर रही है.सरकार ने कोविड-19 संकट और उसकी रोकथाम के लिये लगाये गये ‘लॉकडाउन’ से छोटे प्रतिष्ठानों और उसमें काम करने वाले कर्मचारियों को राहत देने के लिये यह कदम उठाया है. यह योजना उन प्रतिष्ठानों के लिये है जहां कर्मचारियों की संख्या 100 तक है तथा उनमें से 90 प्रतिशत का मासिक वेतन 15,000 रुपये से कम है. इससे पहले, यह लाभ मार्च, अप्रैल और मई, 2020 के वेतन में दिया गया था. अब यह लाभ जून, जुलाई और अगस्त, 2020 के वेतन में मिलेगा.


एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आज (बुधवार) को हुई बैठक में कर्मचारी भविष्य निधि में कर्मचारियों का 12 प्रतिशत और नियोक्ताओं को 12 प्रतिश्त योगदान तीन महीने जून से अगस्त तक और देने का फैसला किया गया है…..”बयान के अनुसार यह मंजूरी मार्च से मई, 2020 तक के लिये पूर्व में दी गयी अनुमति के अलावा है. इस पर कुल 4,860 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है. इससे 3.67 लाख नियोक्ताओं और 72 लाख से अधिक कर्मचारियों को राहत मिलेगी.


जावड़ेकर ने कहा कि निर्णय कर्मचारियों और नियोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर किया गया. इससे एक तरफ जहां कर्मचारियों के पास वेतन के रूप में ज्यादा पैसा आएगा वहीं नियोक्ताओं को भविष्य निधि बकाया के भुगतान में राहत मिलेगी.लाभ तीन महीने के लिये और बढ़ाये जाने से 3.67 लाख प्रतिष्ठानों को नकदी के मोर्चे पर राहत मिलेगी.बयान में कहा गया है कि सरकार 2020-21 के में इसके लिये 4,800 करोड़ रुपये का बजटीय समर्थन उपलब्ध कराएगी. प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत जून से अगस्त, 2020 के दौरान नियोक्ताओं के 12 प्रतिशत योगदान के लाभ लेने वालों को इससे अलग रखा जाएगा.

 

VIDEO:प्राइम टाइम : नियम में बदलाव क्या भविष्य निधि में सेंध?



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बिना सूचना नौकरी छोड़ने वाले 04 डाक्टरों और 40 नर्सों पर एफआईआर के निर्देश


प्रतीकात्मक तस्वीर

नोएडा:

कोरोना वायरस के संक्रमण से लोगों को सुरक्षित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य शिक्षा विभाग रजनीश दुबे ने इंदिरा गाधी कला केंद्र के सभागार में प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ बैठक की. बैठक में कोरोना संकट के बीच ग्रेटर नोएडा के शारदा हॉस्पिटल डाक्टरों और नर्सों के बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी छोड़ने के मामले को शासन ने बेहद गंभीरता से लिया है. स्वास्थ्य शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने इन डाक्टरों और नर्सों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं. 

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अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य शिक्षा विभाग रजनीश दुबे कहा कि सभी कोरोना संक्रमित व्यक्तियों को प्रोटोकॉल के अनुरूप इलाज मिले. उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की संख्या के अनुरूप आगामी परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए कोविड अस्पताल तैयार करने तथा उनमें पर्याप्त मात्रा में बैड व्यवस्था, चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था समय रहते सुनिश्चित की जाए. सेक्टर-06 स्थित इंदिरा गांधी कला केंद्र में प्रदेश के स्वास्थ्य शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव जिले के अफसरों के साथ बैठक कर रहे थे. उसी दौरान ग्रेटर नोएडा के शारदा हॉस्पिटल से बिना पूर्व नोटिस के चार डाक्टरों और 40 नर्सों के नौकरी छोड़कर चले जाने का मामला उठाया गया. इस मामले को अपर मुख्य सचिव ने बेहद गंभीरता से लेते हुए एफआईआर दर्ज कराने और कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिया है. 

शारदा हॉस्पिटल जिले के कोविड-19 हॉस्पिटलों में शुमार है. वहां काम कर रहे 4 डॉक्टर और 40 नर्सों के बिना बताए जॉब छोड़कर चले गए. इससे हॉस्पिटल में कोविड-19 मरीजों के उपचार में बाधा आ रही है. बैठक में गौतमबुद्ध नगर जिले के कोविड-19 के नोडल अधिकारी नरेंद्र भूषण और जिलाधिकारी सुहास एलवाई के अलावा अन्य अधिकारी मौजूद थे.

 

VIDEO:SC ने नोएडा प्रशासन को फटकारा, क्वारंटाइन के मामले में केंद्र के नियमों का करें पालन



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लॉकडाउन का असर: व्यक्ति को पत्नी को पाकिस्तान छोड़कर लौटना पड़ा भारत


लॉकडाउन के कारण भारतीय परिवार महीनों तक पाकिस्तान में ही फंसा रहा

जोधपुर:

राजस्थान का रहने वाला लीलाराम (34) पाकिस्तान के मीरपुर खास में अपनी बीमार सास से मिलने अपने परिवार के साथ जब घर से निकला था, तो उसे इस बात का कतई अंदाजा नहीं था कि उसे अपनी पत्नी के बिना ही देश लौटना पड़ेगा.

कोरोना वायरस को काबू करने के लिए भारत में लागू किए गए लॉकडाउन के कारण परिवार महीनों तक पाकिस्तान में ही फंसा रहा. भारत और पाकिस्तान में इस प्रकार फंसे लोगों को स्वदेश भेजने के लिए सहमति बनने के बाद प्राधिकारियों ने लीलाराम और उसके तीन बच्चों को वापस जाने की अनुमति दे दी, लेकिन उसकी पत्नी जनता (33) के पास भारतीय नागरिकता नहीं होने के कारण उसे भारत नहीं आने दिया गया.

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लीलाराम ने कहा कि इस्लामाबाद में भारतीय दूतावात ने उसकी पत्नी को लौटने की अनुमति नहीं दी और उसे अपनी पत्नी को पाकिस्तान छोड़कर बच्चों के साथ लौटना पड़ा. लीलाराम 1986 में पाकिस्तान से भारत आया था और उसे बाद में भारतीय नागरिकता मिल गई थी, लेकिन उसकी पत्नी के पास भारत की नागरिकता नहीं है और वह दीर्घकालीन वीजा पर यहां रह रही थी.

VIDEO:महाराष्ट्र : ठाणे में 12 जुलाई तक लॉकडाउन



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Coronavirus: झारखंड में एक और मौत, 39 नये मामलों के साथ कुल संख्या 2854 हुई


प्रतीकात्मक तस्वीर

रांची:

झारखंड में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण एक और व्यक्ति की मौत हो गयी तथा संक्रमण के 39 नये मामले सामने आये.राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 2,854 हो गयी. स्वास्थ्य विभाग की सोमवार रात जारी रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में पिछले 24 घंटों में धनबाद में एक व्यक्ति की संक्रमण से मौत हो गयी, जिसे मिलाकर राज्य में संक्रमण के कारण मरने वालों की कुल संख्या 20 हो गयी है. इनके अलावा राज्य में संक्रमण के पिछले 24 घंटों में 39 नये मामले सामने आए हैं, जिन्हें मिलाकर अब राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या 2,854 हो गयी है.

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राज्य में अब तक संक्रमित हुए 2,854 लोगों में से 2,109 सिर्फ प्रवासी मजदूर हैं जो देश के विभिन्न भागों से राज्य में वापस अपने घरों को लौटे हैं. राज्य में 2,068 लोग अब तक ठीक होकर अपने घरों को लौट चुके हैं. इसके अलावा 766 संक्रमितों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है, जबकि 20 अन्य की मौत हो चुकी है. पिछले 24 घंटों में प्रयोगशालाओं में कुल 2390 नमूनों की जांच हुई, जिनमें 39 संक्रमित पाये गये.

VIDEO:रवीश कुमार का प्राइम टाइम: झारखंड में कितना कामयाब रहा है लॉकडाउन?



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विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा- भारत ने कूटनीति  के ऑनलाइन मंचों का बेहतर इस्तेमाल किया है

विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा- भारत ने कूटनीति के ऑनलाइन मंचों का बेहतर इस्तेमाल किया है


कोरोना संकट के दौर में भारत ने डिजिटल माध्यम से कूटनीति को मजबूत किया

नई दिल्ली:

विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 महामारी से उत्पन्न होने वाली स्थिति के कारण कूटनीति जोरदार ढंग से डिजिटल हो गई है, और भारत चुनौती को ऑनलाइन मंचों का इस्तेमाल कर वैश्विक बातचीत शुरू करने के अवसर में बदलने में सबसे आगे रहा है. ‘आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को लागू करने’ पर ‘इंस्टीटयूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया’ द्वारा आयोजित एक वेबिनार में श्रृंगला ने कहा कि कोविड-19 ने कूटनीतिक कैलेंडर को बाधित कर दिया है, जिसके कारण लगभग सभी अंतरराष्ट्रीय बैठकें रद्द हो गई हैं.

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उन्होंने कहा कि संकट के समय में एक समन्वित वैश्विक प्रतिक्रिया की आवश्यकता है, जिससे सभी देशों के बीच निरंतर संचार हो सके.उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) समेत दुनिया के विभिन्न भागों में तनाव में वृद्धि ने केवल संचार की आवश्यकता पर जोर दिया है.श्रृंगला ने कहा कि कूटनीति ने नई स्थिति को अपनाया है और मजबूती के साथ डिजिटल हुई है.उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह की डिजिटल कूटनीति में भारत सबसे आगे रहा है. मैंने पहले उल्लेख किया था कि कैसे प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन मंचों का उपयोग करके चुनौती को वैश्विक बातचीत शुरू करने के अवसर में बदला.”


विदेश सचिव ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार इस माध्यम से ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के साथ एक शिखर सम्मेलन भी किया. वह इस अवधि में 60 से अधिक देशों के अपने समकक्षों से भी बात कर चुके हैं.”उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी अपनी तरफ से 76 देशों के विदेश मंत्रियों से बात की है और वह ब्रिक्स, एससीओ, आरआईसी समूहों की बैठकों में भी शामिल हुए हैं.

 

VIDEO:पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा, ‘लोगों के सहयोग से ही लोकतंत्र मजबूत होता है’



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ऑनलाइन ठगी के शिकार हुए पूर्व PM मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू, शराब के नाम पर लगाया चूना


पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रह चुके हैं संजय बारू. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह (Dr Manmohan Singh) के मीडिया सलाहाकार रहे संजय बारू (Sanjay Baru) के साथ ऑनलाइन ठगी (Online Fraud) का मामला सामने आया है. ऑनलाइन शराब खरीदने के नाम पर ठगों ने संजय बारू को अपना शिकार बनाया. संजय बारू ने साउथ दिल्ली के हौज खास थाने में शिकायत दी है. पुलिस को मिली शिकायत के अनुसार संजय बारू को ऑनलाइन ठगों ने 24 हजार रुपये का चूना लगाया. पुलिस ने मामले में ओला कैब ड्राइवर आबिक जावेद को गिरफ्तार किया है. आरोपी ने ऑनलाइन शराब की फर्जी वेबसाइट बना रखी थी और वह लॉकडाउन को दौरान लोगों को ठगने का काम कर रहा था.

पुलिस को दिये शिकायत के अनुसार, ‘2 जून को संजय बारू शराब खरीदने के लिए ऑनलाइन सर्च कर रहे थे. गूगल सर्च के दौरान उन्हें एक ऑनलाइन शॉप दिखा. उन्होंने वहां से नंबर लेकर फोन किया. दूसरी तरफ से उन्हें ऑनलाइन पेमेंट के लिए कहा गया था.

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पेशेवर पत्रकार रहे हैं संजय बारू (Sanjay Baru)

2014 में  ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ किताब प्रकाशित कर सियासी भूचाल लाने वाले संजय बारू फाइनेंशियल एक्सप्रेस और बिजनेस स्टैंडर्ड के चीफ एडिटर रहे हैं. वह इकोनॉमिक टाइम्स और द टाइम्स ऑफ इंडिया के एसोसिएट एडिटर रहे. उनके पिता बीपीआर विठल मनमोहन सिंह के साथ काम कर चुके थे. जब  मनमोहन सिंह देश के वित्त सचिव थे, तब संजय बारू के पिता बीपीआर विठल उनके फाइनेंस और प्लानिंग सेक्रेटरी थे.

इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री( फिक्की) के महासचिव पद से अप्रैल 2018 में संजय बारू ने इस्तीफा दे दिया. इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेटजिक स्टडीज के जियो इकॉनमिक्स एंड स्ट्रेटजी के डायरेक्टर भी रह चुके हैं.

VIDEO: विवादों के बीच पर्दे पर ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’, जानें- कैसी है फिल्म



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UP Board 10th, 12th Result 2020: यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं परीक्षा के परिणाम आज इस समय होंगे जारी, Result से पहले खुद को ऐसे रखें Tension Free

UP Board 10th, 12th Result 2020: यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं परीक्षा के परिणाम आज इस समय होंगे जारी, Result से पहले खुद को ऐसे रखें Tension Free


UP Board result 2020: यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं क्लास का रिजल्ट आज जारी करेगा.

नई दिल्ली:

UP Board Class 10th, 12th Result 2020: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं का रिजल्ट (UP Board Results) जारी होने में कुछ ही घंटे बाकी हैं. यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं परीक्षाओं का रिजल्ट आज 12 बजे जारी किया जाएगा. रिजल्ट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट upresults.nic.in पर जारी किया जाएगा. रिजल्ट देखने के लिए स्टूडेंट्स को अपने रोल नंबर और रोल कोड की जरूरत पड़ेगी. यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा देने वाले स्टूडेंट्स की धड़कने तेज हैं और वे बस अब जल्द से जल्द अपना रिजल्ट देखना चाहते हैं. वहीं, अकसर ऐसा देखा जाता है कि अधिकतर स्टूडेंट्स अपना रिजल्ट जारी होने से पहले काफी चिंतित और तनाव में रहते हैं. ज्यादा स्ट्रेस लेने की वजह से कई बार स्टूडेंट्स रिजल्ट (UP Board Result 2020) के दिन बीमार पड़ जाते हैं. हम आपको कुछ टिप्स  बता रहे हैं, जिन्हें फॉलो करके आप खुद को रिलैक्स रख सकेंगे. 

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– नेगेटिविटी से खुद को दूर रखें

कई बार एग्जाम में अच्छा करने के बावजूद भी कुछ स्टूडेंट्स ऐसा सोच लेते हैं कि वो परीक्षा में बेहतर कर सकते थे. ये ख्याल कई बार स्टूडेंट्स पर इतना हावी हो जाता है कि वो तनाव में आ जाते हैं. इसलिए आप अपने रिजल्ट के बारे में सिर्फ पॉजिटिव ही सोचें. आप परीक्षा दे चुके हैं, जिसे बदला नहीं जा सकता है, इसलिए खुद को नेगेटिविटी से दूर रखें. 

– एक्सरसाइज करें

खुद को रिलैक्स और शांत रखने के लिए एक्सरसाइज एक बेहतरीन विकल्प है. इसके लिए आपको जिम में जाने की जरूरत नहीं है. आप खुद को रिलैक्स करने के लिए नॉर्मल वॉक कर सकते हैं. घर में रहकर योग कर सकते हैं. ऐसा करने से आप अच्छा महसूस करेंगे. 

– म्यूजिक सुनें

म्यूजिक का हमारे ऊपर काफी गहरा असर होता है. अपना पसंदीदा म्यूजिक सुनने से काफी रिलैक्स महसूस होता है और स्ट्रेस भी कम होता है. इसलिए रिजल्ट आने से पहले खुद फ्रेश रखने के लिए अपनी पसंद का म्यूजिक सुनकर अपने मूड को बेहतर कर सकते हैं. 

– भरपूर नींद लें

कई बार रिजल्ट आने से पहले स्टूडेंट्स तनाव में सो नहीं पाते हैं. इससे स्टूडेंट्स के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और मूड काफी चिड़चिड़ा हो जाता है. इसलिए रिजल्ट से पहले कम से 8 घंटे की नींद जरूर लें. भरपूर नींद लेने से आप फ्रेश महसूस करेंगे. 

– परिवार के साथ समय बिताएं

परिवार हमारी ताकत है. इसलिए रिजल्ट से पहले अपना समय परिवार के लोगों के साथ बिताएं. उनके साथ अपने मन की बातें शेयर करें. उन्हें अपने प्लान्स के बारे में बताएं. घरवालों का सपोर्ट मिलने पर आप हर तरह के तनाव से खुद आजाद महसूस करेंगे. 



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मनरेगा में ऐसा काम दिया कि मजदूर खुद छोड़कर भाग जाएं, टीचर ने खोली पंक्चर मरम्मत की दुकान

मनरेगा में ऐसा काम दिया कि मजदूर खुद छोड़कर भाग जाएं, टीचर ने खोली पंक्चर मरम्मत की दुकान


दिवेश कुमार दिल्ली में गेस्ट टीचर थे, बेरोजगार होने पर इन्होंने पंक्चर रिपेयरिंग का काम शुरू कर दिया है.

नई दिल्ली:

यूपी के गाजियाबाद में मजदूर न मिलने के कारण तीन साल पहले मनरेगा योजना बंद कर दी गई थी लेकिन लॉकडाउन के चलते अब गाजियाबाद के बेरोजगार मनरेगा में रोजगार के अवसर तलाश रहे हैं. लेकिन सरकारी अधिकारी ट्रायल के तौर पर ऐसे काम करवा रहे हैं जिससे मजदूर खुद मनरेगा छोड़कर भाग जाएं. औद्योगिक शहर गाजियाबाद में बेरोजगारी बढ़ गई है. नौकरी करने वाले सैकड़ों लोग लॉकडाउन के दौरान बेरोजगार हो गए. अब वे पेट पालने के लिए छोटे-मोटे व्यवसाय करने को मजबूर हैं.

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 गाजियाबाद के मंडोला गांव में बेरोजगारों की टोली है. इसी टोली के सतेंद्र शर्मा तीन महीना पहले तक भगवती जागरण करते थे. लॉकडाउन में मंदिर बंद हो गए और तो सतेंद्र शर्मा अब पुजारी का काम छोड़कर मनरेगा की मजदूरी में अपना भविष्य तलाश रहे हैं. सतेंद्र शर्मा कहते हैं कि ”मरता क्या न करता, बच्चा भूखे मरेंगे तो उसे देख तो सकते नहीं हैं, इसलिए मनरेगा का काम मांगा. लेकिन तालाब की सफाई करवाकर पैसे अब तक नहीं दे रहे हैं.”

दरअसल गाजियाबाद में तीन साल पहले मनरेगा की योजना यह कहकर बंद कर दी गई थी कि मनरेगा की कम मजदूरी के चलते कोई काम करने को तैयार नहीं है. लेकिन लॉकडाउन के चलते बेरोजगार हो चुके नवीन गुप्ता और पवन कुमार जैसे लोगों ने जब प्रधान और प्रशासन पर मनरेगा के रोजगार का दबाव बनाया तो इन लोगों का आधा-अधूरा जॉब कार्ड बनाकर सीवर के पानी से भरे तालाब की सफाई में लगा दिया गया ताकि ये लोग खुद भाग जाएं.

मंडोला गांव के मनरेगा मजदूर नवीन गुप्ता ने बताया कि ”हम वेबसाइट पर गए तो देखा कि मनरेगा के तहत 200 रुपये की मजदूरी मिल रही है. हमें सरकार का ये प्लान अच्छा लगा लेकिन जॉब कार्ड बनने के बावजूद रजिस्टर्ड नहीं है, हमें तो ठगा गया.”  पवन कुमाार कहते हैं कि ”मेरी तबियत खराब हो रही थी. मैंने सेक्रेटरी साहब से पैसे मांगे. उन्होंने मना कर दिया. मैं तो मजदूरी के पैसे मांग रहा हूं, बस.”

पांच हजार की आबादी वाले मंडोला गांव के ज्यादातर लोगों के खेत अधिग्रहीत होकर वहां इमारतें बन चुकी हैं. इसके चलते फैक्ट्रियों में नौकरी करके ही इनका गुजारा चलता था. राहुल शर्मा अपना छोटा सा घर दिखाते हुए कहते हैं कि ”मनरेगा मजदूर बनना गांव में शर्म की बात मानी जाती है लेकिन अब क्या करें?”

गाजियाबाद के मनरेगा मजदूर अनुज शर्मा ने कहा कि ”सेक्रेटरी साहब ने बोला जाओ तालाब साफ करो. फिर बोलने लगे कि बाहर मजदूरी करते तो चार सौ पांच सौ मिलते, यहां मनरेगा में काम करने चले आए. बेइज्जत करते रहे वहां बैठकर.”

एक तरफ यूपी सरकार एक करोड़ रोजगार देने की बात कह रही है तो दूसरी तरफ मनरेगा के तहत काम मांगने वालों को अधूरा जॉब कार्ड देकर टरकाया जा रहा है. हमने जब मनरेगा की साइट पर देखा तो फिलहाल गाजियाबाद में मनरेगा के काम की मांग शून्य दर्शा रहा है. अब गाजियाबाद प्रशासन सफाई दे रहा है. 

बढ़ती बेरोजगारी के चलते अब गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जैसे औद्योगिक और विकसित शहरों में मनरेगा के काम की मांग आ रही है जबकि यहां सालों से मनरेगा योजना की डिमांड न के बराबर थी. गाजियाबाद और नोएडा जैसे शहरों की चमकदार इमारतों के नीचे बेरोजगारी का अंधेरा धीरे धीरे बढ़ रहा है. हालांकि सरकार ने मनरेगा का बजट बढ़ाकर एक लाख करोड़ रुपये कर दिया है, लेकिन स्थानीय लेवल पर इसे और असरदार और पारदर्शी बनाने की जरूरत है.

गाजियाबाद स्थित बागू कॉलोनी के पास विजय नगर के दिवेश कुमार दिल्ली में गेस्ट टीचर थे. लॉकडाउन लगने से उनकी नौकरी चली गई है. अब उन्होंने साइकिल के टायर पंचर की दुकान खोल ली है. क्या करें पेट तो पालना ही है और परिवार को भी पालना है.

VIDEO : बड़ी डिग्री वाले अब मनरेगा मजदूर



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